तम्मना
आज भी पलकों पे वही ख्वाब बिछाये बैठे है
बरसो से एक ही तम्मना है,कभी न कभी तो ये ख्वाब पुरे होंगे
पर अब भी सवाल एक ही है की क्या कभी मेरी ये तम्मना पूरी होगी भी
या फिर मेरी ये जिन्दगी बस युही इस ख्वाइश में गुजर जाएगी
क्या मै अपनी इस छोटी सी तम्मना को कभी हकीकत में भी महसूस कर पाऊंगी
या फिर तम्मना मेरी जिन्दगी में स्रिफ मेरा एक ख्वाब बनकर ही रह जाएगी
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